Monday, November 4, 2019

China action plan on pollution control

   पॉल्यूशन को हराना है तो अपनाना होगा        चीन का एक्शन प्लान

चीन ने 7 साल में दी प्रदूषण को मात


एक समय था जब दिल्ली-एनसीआर की तरह ही चीन के बड़े शहर धुंध की चादर में लिपटे रहते थे. बीजिंग में तो हर व्यक्ति मास्क पहनकर रहता था. स्कूल-कॉलेज, सरकारी संस्थान बंद कर दिए जाते थे. वायु प्रदूषण का स्तर काफी अधिक होता था
लेकिन चीन ने इस वायु प्रदूषण के खिलाफ 2013 में जंग छेड़ी और अब 7 साल बाद हालात ये हैं कि वहां के शहरों में धुंध और वायु प्रदूषण का स्तर काफी हद तक गिर गया है. हम भी उसके जैसे उपायों को अपनाकर वायु प्रदूषण को मात दे सकते हैं. 8 बड़े शहर थे सबसे प्रदूषित के 2012 तक चीन में वायु प्रदूषण कारण हालात काफी खराब थे. चीन के 90 परसेंट शहरों की हवा का स्तर कई गुना अधिक था. चीन के 74 बड़े शहरों में से केवल आठ शहरों में वायु प्रदूषण निर्धारित स्तर से कम था.

कारखानों को उत्तर चीन और पूर्वी चीन से दूसरे स्थानों पर ले जाया गया या बंद कर दिया गया.
ऐसा वायु प्रदूषण कम करने के लिए किया गया. बहुत से कारखानों में उत्पादन कम कर दिया गया.चीन ने देश में कोयले का इस्तेमाल काफी घटा दिया.

जर्जर वाहनों को सड़कों से हटाया गया और बीजिंग, शंघाई और गुआंगझोऊ में सड़कों पर कारों की संख्या कम कर दी गई.

कोयला आधारित नए प्लांट्स को मंजूरी देनी बंद कर दी गई. अगर दी भी गई तो उन्हें बीजिंग और बड़े शहरों से दूर रखा गया.

बड़े शहरों में बड़े-बड़े एयर प्यूरीफायर लगाने की योजना शुरू की गई.

ताजी हवा के गलियारेबनाए गए, जिसके तहत बड़े पैमाने पर पेड़ लगाए गए.

बड़े शहरों में लो कॉर्बन पार्क बनाए गए यानि वो इलाके जो कम कॉर्बन का उत्सर्जन करें.

चीन में औद्योगिक कामों को घटाया गया. कई कोयला खुदाने देश के प्रमुख शहरों में 2020 तक वायु प्रदूषण 60 परसेंट तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है.

लोगों को चूल्हे की जगह नेचुरल गैस या बिजली हीटर मुहैया कराए गए 


डब्ल्यूएचओ ने बताया, बच्चों को प्रदूषण से इस तटह बचाएं



प्रदूषण से बचने के लिए कई लोग घर से बाहर मास्क में देखे जा सकते हैं, लेकिन बच्चे काफी नाजुक होते हैं और उनपर पर्यावरण का यह का बिगड़ा मिजाज काफी भारी पड़ सकता है. ऐसे में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने भी कुछ टिप्स दिए हैं, जिसे अपनाकर बच्चों को इस जहर से बचाया जा सकता है.

खेतों के कटाई के बाद बचा फूस, घरेलू कूड़ा जलाना बंद करें. ऐसा करने से काफी प्रदूषण फैलता है. 
आप चाहें तो घरेलू कचरे की रीसाइक्लिंग कर उससे खाद भी बना सकते हैं, जोकि पेड़ पौधों के लिए काफी फायदेमंद भी रहेगी.

बच्चों को बहुत भीड़ भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें. बहुत ज्यादा बिजी रहने वाली रोड की अपेक्षा शांत रास्ते का चुनाव करें, ताकि धुएं से सुरक्षित रहा जा सके. प्रयास करें कि बाहर जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करें.

वायु प्रदूषण के स्तर पर नजर रखें और अपने बच्चे को इसके बारे में बताएं और ये भी बताएं कि ये प्रदूषण कितनाl नुकसानदायक है. बच्चे को मास्क का महत्व बताएं ताकि आपकी गैर मौजूदगीमें भी वो जागरूक रह सके


बच्चों को घर के अंदर प्रदूषण से बचाने के लिए बेहतर है कि स्मोकिंग से बचें. 

किचन में चिमनी का इस्तेमाल करें ताकि खाना पकाते वक्त पैदा हुआ धुंआ इससे बाहर निकल सके. किचन हवादार जगह पर बनाएं, ताकि अगर खाना बनाते वक्त धुंआ हो तो वो खिड़कियों या रोशनदान ले रास्ते बाहर निकल जाए.

 China action plan on pollution


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Sunday, November 3, 2019

Tik Tok latest news


                 Tik Tok latest news



अमेरिका के अनुसार टिक टाक ने चीन को भेजा डाटा




लोकप्रिय वीडियो शेयरिंग
एप ट्रिक-टॉक चीन को डाटा भेजने के
संदेह के दायरे में आ गया है. अमेरिका
ने इस चीनी एप के खिलाफ जांच
शुरू कर दी है. जासूसी के संदेह में
ट्रंप प्रशासन चीन की टेलीकॉम कंपनी
हुआवे समेत कई प्रौद्योगिकी कंपनियों
पर पहले ही रोक लगा चुका है.

क्या है मामला?


जांच से जुड़े करीबी अधिकारियों ने
बताया कि अमेरिका में विदेशी निवेश
पर बनी समिति इस मामले की समीक्षा
कर रही है. यह संघीय समिति राष्ट्रीय
सुरक्षा के आधार पर विदेशियों
अमेरिकी कंपनियों के अधिग्रहण
की समीक्षा करती है. यह गोपनीय
जांच सांसदों की ओर से चिंता जताए
जाने के बाद शुरू हुई है. कई सांसदों
ने अमेरिका में टिक-टॉक के बढ़ते
प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी. एक
अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी
सरकार के पास एप की ओर से डाटा
चीन भेजे जाने के सुबूत हैं. इस जांच
पर चीनी कंपनी बाइटडांस के प्रवक्ता
ने एक ईमेल में कहा, 'हम नियामक)
की प्रक्रिया पर कोई टिप्पणी नहीं कर
सकते. टिक-टॉक का यह स्पष्ट रुख है।
कि अमेरिका में यूजर्स और नियामकों
का विश्वास जीतने से ज्यादा हमारे
लिए कोई उच्च प्राथमिकता नहीं है.
टिक-टॉक ने किसी यूजर का डाटा
चीन नहीं भेजा. '

 अमेरिकी एप को किया
था एक्वायर


चीन की सात साल पुरानी बाइटडांस
नामक कंपनी ने नवंबर, 2017 में
करीब एक अरब डॉलर में अमेरिका
के म्यूजिकल डॉट एलवाई एप का
अधिग्रहण किया था. अधिग्रहण
के समय म्यूजिकल डॉट एलवाई
अमेरिका में काफी लोकप्रिय था.
अमेरिका और यूरोप में इसके करीब
छह करोड़ यूजर थे. बाइटडांस ने
कहा था कि म्यूजिकल डॉट एलवाई
को चीनी एप से अलग रखा जाएगा,
लेकिन एक साल के अंदर ही इसका
इसी तरह की सेवा में विलय कर
टिक-टॉक नाम दे दिया गया.

Tik Tok latest news 




Saturday, November 2, 2019

South Indian actress Kajal Agarwal


South Indian actress Kajal Agarwal




Kajal Agarwal

एक इंटरव्यू में काजल ने बताया था कि
उन्हें इंडस्ट्री में शादी करने में कोई इंटरेस्ट
नहीं है, इसके साथ ही उन्होंने बताया कि
इससे पहले भी बह एक कॉमन मैन के
साथ रिलेशन में थीं लेकिन मूवीज में बिजी
होने और टाइम ना होने के कारण वे अलग
हो गए थे.

अगले साल होगी काजल
अग्रवाल की शादी


साउथ सिनेमा में अपनी पहचान बनानेके बाद एक्ट्रेस काजल अग्रवाल ने बॉलीवुड में भी अपनी एक्टिंग की छाप छोड़ी है. काजल इन दिनों अपनी मूवीज में काफी बिजी चल रही हैं।
लेकिन इस बीच खबर आई है कि यह एक्ट्रेस जल्द शादी के बंधन में बंधने वाली है. कहा जा रहा है कि काजल अगले साल शादी कर रही हैं. बिजनेसमैन पर आया दिल काजल फिल्म इंडस्ट्री में नहीं बल्कि एक बिजनेसमैन के साथ शादी कर रही हैं. इस बात की जानकारी खुद काजल ने मीडिया को दी है. काजल इन दिनों अपनी अपकमिंग मूवीज की शूटिंग के चलते बिजी हैं जिंन्हें कम्पलीट करने के बाद ही वह शादी करेंगी. सोर्सेज की माने तों काजल का ये रिश्ता उनकी फैमिली की पंसद का है.







Friday, November 1, 2019

What is dark web?



क्या है डार्क वेब?

गूगल या किसी अन्य ब्राउजर में हम
जब भी कुछ सर्च करते हैं तो हमें लाखों
नतीजे मिल जाते है. हालांकि, यह सिर्फ
4 परसेंट हिस्सा है. जो 96 परसेंट सर्च
रिजल्ट में नही दिखता है, वह डीप वेब
होता है. डीप वेब का ऐक्सेस उसी शख्स
को मिलता है, जिसका उससे सरोकार
होता है. इसी का एक छोटा हिस्सा
डार्क वेब है, जो सायबर अपराधियों की
पनाहगार है. इसमें ड्रग, मानव तस्करी,
अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त
के साथ डेबिट-क्रेडिट कार्ड जैसी
संवेदनशील जानकारियां बेचने जैसे
तमाम गैरकानूनी काम होते हैं.

हैकर्स की जद में आए 13 लाख कार्डस



मात्र 7 हजाट रुपए में बिक रही आपके कार्ईड की डीटेल, हैकर्स साफ़ कर सकते हैं अकाउंट

भारत के लगभग 13 लाख डेबिट
और क्रेडिट कार्ड की डीटेल्स बिक्री
के लिए उपलब्ध हैं. डार्क वेब पर
यह अब तक का सबसे बड़ा डेबिट
क्रेडिट कार्ड स्कैम है और इसमें से
98 परसेंट भारतीय बैंकों के काड्ड्स
आईबी साइबर सिक्योरिटी ग्रुप फर्म के मुताबिक, 13 लाख कार्ड डीटेल्स एक वेबसाइट पर मौजूद हैं.
जेडीनेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक
ग्रुप आई ने कहा है कि इन काड्ड्स
की डीटेल 100 डॉलर यानी 7 हजार
रुपए में बेची जा रही है. हैकर्स
आम तौर पर बल्क में कार्ड डीटेल्स
खरीदते हैं और फिर इन्हें एक-एक
करकेकरते हैं और सफल होने
यूज पर उन कार्ड्स में कुछ के अकाउंट्स
खाली कर देते हैं. हालांकि क्वार्ड का
सोर्स पता नहीं चल पाया है कि इसे
कहां से लाय गया है

इस तटह डेटा चोरी से  बच सकते हैं


किसी भी डेबिट या क्रेडिट कार्ड को
किसी एटीएम में यूज करने से पहले उस
एटीएम की ठीक से जांच कर लें. कही कोई डिवाइस तो अटैच नहीं है. सुनसान जगह के एटीएम या फिर ऐसा एटीएम जिसे देख कर आपको लग रहा है कि इसके साथ छेड़छाड़ की गई
है, इसमें एटीएम कार्ड न डालें. अगर एटीएम आपसे अलग तरीके के करमंड फॉलो करने के लिए कहे तो अलर्ट हो जाएं, जैसे ट्रांजैक्शन पूरा करने के लिए पिन दो बार एंटर करने को कहे. किसी भी शॉपिंग साइट का इस्तेमाल करने से पहले सुनिश्चित कर लें कि कही वह साइट फर्जी तो नहीं. सिक्योर सॉकेट्स लेयर (एसएसएल) सर्टिफाइड साइपर ही शॉपिंग करें. सिक्योर साइट्स पर यूआरएल बॉक्स में लॉक-का सिंबल होता है. वेबसाइट के लिंक में एचटीटीपी
प्रोटोकॉल है या नहीं.



Thursday, October 31, 2019

Big disaster for mumbai and other countries of the world in 2050

       साल 2050 तक समंदर में 'डुब' जाएगी मुंबई



क्लाइमेट सेंट्रल की रिसर्च का टावा, समुद्र स्तट में बढ़ोतरी से जलमव्न हो जाएंगे दुनिया के कई शहर-
मायानगरी के नाम से फेम देश की फाइनेंशियल कैपिटल मुंबई 2050 तक समंदर में डुब जाएगी. सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई और देशों के वी शहर जो समंदर से जुड़े हुए हैं, उनके डूबने का भी खतरा है.
 यह दावा किया है न्यूजर्सी के साइंस  ऑर्गनाइजेशन क्लाइमेट सेंट्रल ने हाल ही में की गई अपनी एक स्टडी के जरिए, इसमें बताया गया है कि बढ़ता समुद्री जल स्तर 2050 तक अनुमानित आंकड़े से तीन गुना अधिक आबादी यानी डेढ़ अरब लोगों को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, इस स्टडी में की पॉपुलेशन ग्रोथ और फ्यूचर कोस्टल डिस्ट्रक्शन शामिल नहीं है, लेकिन खतरे को गंभीर माना गया है.

हाई टाईड का खतरा 

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिसचर्स ने भूमि की ऊंचाई की कैलकुलेशन के लिए सैटेलाइट रीडिंग के आधार पर एक एक सटीक तरीका विकसित किया है. यह बड़े क्षेत्रों में समुद्र स्तर के प्रभाव के आकलन का एक बेहतरीन तरीका है. इसमें पाया गया कि पिछला कैलकुलेशन हकीकत से बहुत ज्यादा दूर था. नई रिसर्च के मुताबिक, डेढ़ अरब लोग 2050 तक हाई टाइड की चपेट में आ सकते हैं. रिसर्च की नई संभावना के अनुसार, कई द्वीपों से निर्मित मुंबई के पूरी तरह डूब जाने का खतरा है.

खतरे नें या इूब चुके दुनिया के कई द्वीप

18 द्वीप दुनिया में पूरी तरह जलमगन हो चुके हैं।
54 द्वीपों के समूह सुंदरवन पट मंडरा रहा है खतरा।
30 साल मे सुंदरवन में 7,000 लोग कटाव से विस्थापित।

लुप्त हो जाएगा अलेक्जेंड्रिया

इजिप्ट का अलेक्जेंड्रिया भी 2050 तक पानी में डूबने के
कगार पर है. सिकंदर महान ने जिस शहर को बसाया था वहां
की सांस्कृतिक विरासत का लुप्त होना बड़ी तबाही ला सकता है.
इराक मैं दूसरा सबसे बड़ा शहर बसरा 2050 तक ज्यादातर
पानी के नीचे हो सकता है.


"इस रिसर्च का कॉनक्लूजन यही है कि इन देशों को अपने नागरिकों को नए स्थान पर बसाने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए.हम खतरे की घंटी बजाने की कोशिश कर रहे है. हम
जानते हैं कि वह दिन नजदीक आ रहा है."


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Wednesday, October 30, 2019

Human brain (india research)

  

रिसर्च में दावा, साइज में छोटा होता है इंडियंस का दिमाग..

वेस्टर्न और ईस्टर्न कंट्रीज
के मुकाबले इंडियंस के दिमाग का
साइज छोटा होता है. हाल ही में
हैदराबाद में हुई एक रिसर्च में इस
बात का खुलासा हुआ है. इस रिसर्च
की रिपोर्ट के मताबिक. इंडियंस के
दिमाग की लंबाई, चौड़ाई और घनत्व
तीनों में ही पूर्व और पश्चिम के देशों
के लोगों की तुलना में कुछ छोटा होता
है. यह रिसर्च न्यूरॉलजी इंडिया नामक
मेडिकल जरनल में पब्लिश हुई है.

इंडियन ब्रेन एटलस तैयार
रिसर्च के दौरान हैदराबाद
आईआईआईटी द्वारा पहली बार
इंडियन ब्रेन एटलस तैयार किया गया.
यह रिसर्च अल्जाइमर और ब्रेन से जुड़ी
अन्य बीमारियों को ध्यान में रखकर की गई. उम्मीद की जा रही है कि इस स्टडी के बाद ब्रेन से जुड़ी परेशानियों
को समझने में काफी मदद मिलेगी.

'आइडल पैटर्न नहीं'
यह स्टडी इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट
ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी,
हैदराबाद (आईआईआईटी-एच)
के शोधकताओं द्वारा की गई. इस
प्रॉजेक्ट पर काम करने वाली सेंटर
फॉर विजुअल इंफॉर्मेशन टेक्नॉलजी
के जयंती सिवास्वामी के अनुसार,
दिमाग से जुड़ी बीमारियों को मॉनिटर
करने के लिए मॉन्ट्रियल न्यूरॉलजिकल
इंस्टीट्यूट (एमएनआई) टेम्पलेट का  उपयोग मानक के रूप में उपयोग किया जाता है.
 शोधकताओं के अनुसार, इस टेम्पलेट को कोकेशियान दिमाग को ध्यान में रखकर डिवेलप किया गया है , जो कि भारतीय लोगों के दिमाग से जुड़ी बीमारियों को जांचने के लिए एक आइडल पैटर्न नहीं है.

मिस्डाइग्नॉज की वजह बन सकता है


जयंती सिवास्वामी के अनुसार, वयोंकि
भारतीय लोगों के ब्रेन का साइज
एमएनआई की तुलना में साइज में छोटा है,
जो कि कई अलग-अलग स्कैन में सामने
आया है. एमएनआईके जरिए भारतीय ब्रेन
की जांच करना मिसडाइ्नॉज की वजह
बन सकता है. हमने एमआरआईइमेज
हुकंपेयर किया तो यह बात सामने आई.

लार्ज एटलस बनाए जाने कि जरूरत.. 


हमारे पास इस शोध से जुड़े पुख्ता प्रमाण है, जिनसे इस बात की जरूरत महसूस

होती है कि ब्रेन के स्ट्क्चर और उससे जुड़ी बीमारियों को स्टडी करने के लिए एक

लार्ज एटलस बनाए जाने कि जरूरत है, जिससे इस बात को समझा जा सके कि

दिमाग के साइज के अलग-अलग प्रकारों में किसे सामान्य मानकर शोध किए

जाने चाहिए.जयती ने आगे कहा कि ब्रेन साइज को लेकर अब जक जितने भी

टेम्पलेट डिवेलप किए गए उनमें चीनी और कोरियाई ब्रेन टेम्पलेट्स भी शामिल हैं।

लेकिन भारत-विशिष्ट आबादी के लिए कोई संगत टेम्पलेट इससे पहले डिवेलप

नहीं किया गया था. हैदराबाद आईआईआईटी की टीम ने इस दिशा में पहला प्रयास

किया है. ताकि इंडियन ब्रेन स्पेसिफिक एटलस डिवेलप किया जा सके.

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Tuesday, October 29, 2019

NGO ( happy fridge)

Happy fridge for poor

 Bhubaneswar (Odisha) [India], Oct 23 (ANI): In its bid to ensure that no person goes to sleep on an empty stomach, a non-profit organization with active participation by citizens has installed two refrigerators in the city to provide food to those in need.
The 'Happy Fridge' by (NGO) Feeding India has been set up in two locations in the city.
"We have installed two Happy Fridge at two locations in the city, almost all of us at times throw away the extra food cooked in our households into waste. This could alternatively be used to provide a one-time meal for the needy," Shyama Singh, city in-charge of the NGO said on Wednesday.
The fridges installed at the prominent locations are coming in handy in providing meals to the beggars and poor people who live on the streets among others.
Singh said that the people who were interested in donating food can either deposit the food themselves at the fridges installed in the city or call up the volunteers of Feeding India to collect the food from their homes.
"People can donate us their waste Food by either calling up our volunteers to their houses or can themselves put the food in 'Happy Fridge'. We appeal to the citizens to donate their extra food to the helpless people and become a hero for them," Singh said.
Such efforts which positively affect the community have been on the rise lately, as earlier this month the Southern Western Railway had installed a public refrigerator at Hubli Junction in Karnataka to avoid the wastage of food. (ANI)


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